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प्रसाद काव्य कोश (PRASAD KAVYA KOSH)

Rs 950.00 Rs 500.00

  • Pages: 326
  • Year: 2017, 1st Ed.
  • ISBN: 978-81-933815-0-2
  • Binding: Hard Bound
  • Language: Hindi
  • Publisher: The Marginalised Publication

Description

प्रसाद की कविता के पठन-पाठन और उसपर शोध के लिए उपयोगी पुस्तक

‘‘प्रसाद का काव्य-संसार गहरा है, दार्शनिक है, अनेक रहस्यमय है, रोमानी है और प्रायः मोहक है। यह सब रचने में उनकी भाषा का प्रमुख योगदान है। प्रसाद प्रायः अबूझ शब्दों का प्रयोग नहीं करते। प्रसंगवश किसी संदर्भविशेष के शब्द वे अवश्य ले आते हैं। उस शब्द का अर्थ जान लेने पर समझ में आ जाता है कि यह प्रयोग, वैचित्र्य उत्पन्न करने के लिए नहीं किया गया था। ‘कामायनी’ में वैदिक कथा है, इसलिए उससे जुड़े शब्द मिलते हैं, जैसे-‘पवमान’, ‘तिमिंगल’ आदि। प्रसाद माधुर्य-भाव में जितने रोमानी हैं, उतने ही आध्यात्मिक प्रश्नों के सुलझे हुये रहस्यदर्शी भी। वे रहस्य रचते नहीं, बल्कि ‘सुलझा हुआ रहस्य’ सामने रखने में विश्वास करते हैं, इसलिए उनकी भाषा गाँठदार नहीं है। शब्दों के साथ विशेषण लगाने की अद्भुत कला के धनी होने के कारण वे छायावादी काव्य-भाषा को सुबोध परिपक्वता प्रदान करते हैं। विशेषण-विशेष्य के अनगिनत नए प्रयोग उनकी शक्ति हैं। छायावादी कवियों में हिन्दी भाषा का स्वाभाविक प्रवाह सबसे ज्यादा प्रसाद में ही मिलता है। प्रसंगवश कहा जा सकता है कि निराला की काव्य-भाषा की विशेषता प्रयोगधर्मिता में है, स्वाभाविक प्रवाह में नहीं। उनकी कविता के बड़े हिस्से में हिन्दी भाषा के स्वाभाविक प्रवाह में बाधा उत्पन्न हुई है। इस दृष्टि से पन्त और महादेवी का दायरा अपेक्षाकृत छोटा है।’’

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