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छायावादी काव्य-कोश (प्रीबुकिंग)

Rs 1,850.00 Rs 1,500.00

  • Pages: 650
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • ISBN: 978-93-87441-41-5
  • Binding: Hard Bound
  • Language: Hindi
  • Publisher: The Marginalised Publication

Description

छायावाद के पठन-पाठन और उस पर शोध के लिए उपयोगी पुस्तक

छायावादी काव्य–कोश में छायावाद के चार कवियों की कविताओं से प्रविष्टियाँ ली गयी हैं। (1918–1936) के दौर में छायावादी कविता लिखनेवालों की बड़ी संख्या थी, मगर कालक्रम से यह मान्यता रूढ़ हो गयी कि छायावादी कवि के तौर पर जयशंकर प्रसाद (1889–1937), सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला (1898–1961), सुमित्रानंदन पंत (1900–1977) और महादेवी वर्मा (1907–1988) की कविताओं को ही समझा जाए। नामवर सिंह ने छायावाद के नाम और कवियों पर विचार करने के क्रम में लिखा है, छायावाद नाम सबसे पुराना होने के साथ ही प्रसाद, निराला, पंत, महादेवी की कविता के लिए रूढ़ भी हो गया है। ऐसी हालत में ‘छायावाद’ शब्द का अर्थ चाहे जो हो, परंतु व्यावहारिक दृष्टि से यह प्रसाद, निराला, पंत, महादेवी की उन समस्त कविताओं का द्योतक है, जो 1918 से 36’ ई. के बीच लिखी गयीं। छायावाद की मनमानी परिभाषा करने की अपेक्षा उसके ऐतिहासिक और व्यावहारिक अर्थ को स्वीकार करना अधिक वैज्ञानिक है।

इसलिए प्रस्तुत कोश में छायावाद के इन चार कवियों की कविताओं से ही प्रविष्टियाँ ली गयी हैं। इन चारों कवियों की सभी कविताएँ छायावाद के अंतर्गत शामिल नहीं की गयी हैं। प्रसाद और महादेवी की कविताओं का ज्यादातर हिस्सा छायावादी है। निराला की लगभग आधी कविताएँ छायावादी दौर में लिखी गयी हैं। पंत की कविताओं का गैर–छायावादी हिस्सा उनकी छायावादी कविताओं की तुलना में बहुत बड़ा है।

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