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दलित स्त्रीवाद Dalit Streevad)

Rs 825.00 Rs 500.00

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  • Pages: 364
  • Year: 2017, 1st Ed.
  • ISBN: 978-93-87441-14-9
  • Binding: Hard Cover
  • Language: Hindi

Description

यूं तो दलित स्त्रीवाद पर पिछले एक दशक से कुछ महत्वपूर्ण लेख, बहस व पुस्तकें सामने आई हैं, पर दलित स्त्रीवाद की सैद्धांतिकी और अवधारणा पर कभी उतनी गंभीरता और समग्रता के साथ बहस नहीं हुई. स्त्रीवाद की अन्य धाराओं से अलग, मानवाधिकार के सार्वभौमिक मूलभूत सिद्धांत के साथ, अम्बेडकरवादी विचारधारा से लैस यह पुस्तक शर्मिला रेगे और वीणा मजूमदार के विचारोत्तेजक सैद्धान्तिकियों से अपने को सशक्त बनाती है. दूसरे संदर्भ में यह पुस्तक वर्चस्वशाली समूह की विचारधारा(ब्राह्मणवादी/द्विजवादी), जो अपने अलग-अलग रूपों में मुद्दे, एजेंडे सेट करती है और इसे चुनौती देनेवाली आवाज़ जो समानता के साथ-साथ अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करती है, को अलगाववादी, जातिवादी और संकीर्ण करार देती है, को एक पूरे सैद्धांतिक ढाँचे में समझाती है. गोपाल गुरु, उमा चक्रवर्ती, शर्मीला रेगे, निवेदिता मेनन, बजरंग बिहारी तिवारी आदि अनेक स्त्रीवादी आलोचकों से संवर्धित यह पुस्तक सभी के लिए अत्यंत उपयोगी होने की काबलियत रखती है.

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