स्त्रीकाल, स्त्री का समय और सच, संयुक्तांक, अप्रैल-सितम्बर 2018 (STREEKAAAL,APRIL-SEP 2018)

Rs 40.00

  • Pages: 116
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • ISSN : 2249-4146
  • Binding: पेपर बेक 
  • Language: हिंदी
  • Publisher: The Marginalised Publication

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Description

स्त्रीकाल, स्त्री का समय और सच.

त्रैमासिक हिंदी पत्रिका. संयुक्तांक, अप्रैल-सितम्बर 2018

विशेष : स्त्री स्वास्थ्य और जेंडर

इस अंक में पढ़ें:

आलेख
• स्त्री देह के वैद्यकीय रूपक : रजःस्वला और रजोनिवृत्ति : एमिली मार्टिन
• जेण्डर भूमिकाएं और स्त्री स्वास्थ्य : एमिली मार्टिन,
• जेण्डर, लिंग और स्वास्थ्य : कैसे जुड़े हुए हैं, और क्यों प्रासंगिक हैं? : नेंसी क्रेगर
• पुरुष स्वास्थ्य : एक जेण्डर-संवेदी विश्लेषण : डॉन साबो,

साक्षात्कार
आदिवासी समाज अपेक्षाकृत जेण्डर मुक्त समाज है:
आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में काम करने वाली लीजेंड डॉ. रानी बंग से डॉ. अनुपमा गुप्ता की बातचीत

आलेख
• स्त्रियों के साथ पारिवारिक व सामाजिक हिंसा और इसके स्वास्थ्य दुष्परिणाम : डॉ. एस. छाबड़ा
• यौन-हिंसा : चिकित्सकों की जवाबदेही : डॉ. इन्द्रजीत खांडेकर, अनु.-डॉ. विशाखा जैन
• सामाजिक कंस्ट्रक्ट को उजागर करता ‘स्टिंग’ : डॉ. अनुपमा गुप्ता, डॉ. मनोज चतुर्वेदी
• रजोनिवृत्ति-पश्चात् अस्थि-क्षरण (पोस्टमेनोपोजल ऑस्टिओपारेसिस) : डॉ. संजय बजाज
• स्तन कैंसर : भारतीय स्त्रियों को इसके बारे में क्यों जानना चाहिए? : डॉ. वीरेन्द्र जे. व्यास
• स्त्री यौनिकता मिथक और सत्य : डॉ. संजय देशपांडे,
• आधुनिक जीवन शैली और स्त्री-स्वास्थ्य : डॉ. ओ. पी. गुप्ता
• स्त्रियों का मानसिक स्वास्थ्य : जैविक तथा सामाजिक : डॉ. प्रवीण खैरकर
• पुनरुत्पाद की राजनीति और महिला स्वास्थ्य : आकांक्षा

कहानी
बड़ा सौदागर कौन : रज़िया सज्जाद ज़हीर

कविताएं
सविता सिंह, नीरा परमार, असंगघोष, मुसाफिर बैठा, अमृता सिन्हा, सुनीता झाड़े,
नीतिशा खलखो, आमिर विद्यार्थी

साक्षात्कार

इस दौर की राजनीति स्त्रियों की राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक स्तर पर बराबर भागीदारी चाहती ही नहीं
वरिष्ठ स्त्रीवादी अधिवक्ता अरविंद जैन से मनोज कुमार गुप्ता, प्रीतिमाला सिंह, गीतेश, शंभु गुप्त की बातचीत
आलेख:
• इकाई नहीं मैं करोड़ों पदचाप हूं मैं : अनिता भारती
• स्त्रीवाद की चुनौतियां : कल और आज : प्रमीला केपी
• सती हुई तो क्या हुआ! : चैताली सिन्हा
समीक्षा
• संभावनाओं की तराश में कवि : रजनी अनुरागी
अंक के अनुवादक: डा. अनुपमा गुप्ता, विशाखा जैन, डा. ओ पी गुप्ता

 

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